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Wednesday, November 5, 2014

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है... - kaun kahta hai muhabbat ki zubaan hoti hai

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है

रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें
दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है

ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है 'साहिर'
शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है

Thursday, December 5, 2013

हरसू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे... - harsu dikhai dete hain wo jalwagar mujhe

हरसू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे,
क्या क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे,

डाला है बेख़ुदी ने अजब राह पर मुझे,
आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे,

दिल लेके मुझसे देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे,
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे,

आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे,
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे.

Friday, April 5, 2013

मेरी तन्हाइयों तुम ही लगा लो - meri tanhaiyon tum hi laga lo

मेरी तन्हाइयों तुम ही लगा लो मुझको सीने से,
के मैं घबरा गया हूँ इस तरह रो रो के जीने से

ये आधी रात को फिर चूड़ियाँ सी क्या खनकती हैं
कोई आता है या मेरी ही ज़ंजीरें खनकती हैं
ये बातें किस तरह पूछूँ मैं सावन के महीने से

पीने दो मुझे अपने ही लहू का जाम पीने दो
ना सीने दो किसी को भी मेरा दामन ना सीने दो
मेरी वहशत ना बढ जाये कहीं दामन के सीने से

Sunday, August 5, 2012

वो नहीं मिलता मुझे इसका गिला... - wo nahin milta mujhe iska gila

वो नहीं मिलता मुझे इसका गिला अपनी जगह,
उसके मेरे दरमियाँ का फ़ासिला अपनी जगह,

ज़िन्दगी के इस सफ़र में सैकड़ों चेहरे मिले,
दिलकशी उनकी अलग, पैकर तेरा अपनी जगह,

तुझसे मिल कर आने वाले कल से नफ़रत मोल ली,
अब कभी तुझसे ना बिछड़ूँ  ये दुआ अपनी जगह,

इक मुसलसल दौड़ में हैं मन्ज़िलें और फ़ासिले,
पाँव तो अपनी जगह हैं रास्ता अपनी जगह.

Thursday, July 5, 2012

कोई पास आया सवेरे-सवेरे... - koi paas aaya savere-savere

कोई पास आया सवेरे-सवेरे,
मुझे आज़माया सवेरे-सवेरे,

मेरी दास्ताँ को ज़रा-सा बदल कर,
मुझे ही सुनाया सवेरे-सवेरे,

जो कहता था कल शब संभलना-संभलना,
वही लड़खड़ाया सवेरे-सवेरे,

जली थी शमा रातभर जिसकी ख़ातिर,
उसी को जलाया सवेरे-सवेरे,

कटी रात सारी मेरी मैकदे में,
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे.

Sunday, June 5, 2011

दुनिया जिसे कहते हैं... - duniya jise kahte hain...

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है,

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम,
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है,

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है,

ग़म हो के ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं,
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है.

Monday, August 24, 2009

जब कभी तेरा नाम - jab kabhi tera naam...

जब कभी तेरा नाम लेते हैं,
दिल से हम इन्तकाम लेते हैं,

मेरी बरबादियों के अफ़साने,
मेरे यारों के नाम लेते हैं,

बस यही एक ज़ुर्म है अपना,
हम मुहब्बत से काम लेते हैं,

हर कदम पर गिरे, मगर सीखा,
कैसे गिरतों को थाम लेते हैं,

हम भटककर जुनूं की राहों में,
अक्ल से इन्तकाम लेते हैं.

Sunday, August 23, 2009

तुम नहीं, ग़म नहीं, शराब नहीं - tum nahin, gham nahin, sharaab nahin...

तुम नहीं, ग़म नहीं, शराब नहीं,
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं,

गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजे,
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं,

जाने किस किस की मौत आयी है,
आज रुख़ पे कोई नक़ाब नहीं,

वो करम उँगलियों पे गिनते हैं,
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं,

जो क़यामत न ढा सके 'राही',
वो किसी काम का शबाब नहीं.