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Wednesday, December 5, 2012

घर से हम निकले थे - ghar se hum nikle the...

घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को,
रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को,

ये ज़बां चलती है, नासेह के छुरी चलती है,
ज़ेबा करने मुझे आये है के समझाने को,

आज कुछ और भी पी लूं के सुना है मैने,
आते हैं हज़रत-ए-वाइज़ मेरे समझाने को,

हट गई आरिज़-ए-रोशन से तुम्हारे जो नक़ाब,
रात भर शम्मा से नफ़रत रही दीवाने को.

Wednesday, June 6, 2012

चराग़-ए-इश्क़ जलाने की रात - charaag-e-ishq jalaane ki raat

चराग़-ए-इश्क़ जलाने की रात आई है,
किसी को अपना बनाने की रात आई है,

फ़लक का चांद भी शरमा के मुंह छुपाएगा,
नक़ाब रुख़ से हटाने की रात आई है,

निग़ाह-ए-साक़ी से पैहम छलक रही है शराब,
पियो के पीने पिलाने की रात आई है,

वो आज आये हैं महफ़िल में चांदनी लेकर,
के रौशनी में नहाने की रात आई है.

Sunday, May 20, 2012

गोपाल गोकुल वल्लभे - Gopal Gokul Vallabhe

गोपाल गोकुल वल्लभे प्रिय गोप गोसुत वल्लभं
चरणारविन्दमहं भजे भजनीय सुरमुनि दुर्लभं

घनश्याम काम अनेक छवि लोकाभिराम मनोहरं
किंजल्क वसन किशोर मूरति भूरिगुण करुणाकरं

सिरकेकी पच्छ विलोलकुण्डल अरुण वनरुहु लोचनं
कुजव दंस विचित्र सब अंग दातु भवभय मोचनं

कच कुटिल सुन्दर तिलक ब्रुराकामयंक समाननं
अपहरण तुलसीदास त्रास बिहारी बृन्दाकाननं


Thursday, March 29, 2012

दिन गुज़र गया ऐतबार में - din guzar gaya aitbaar me

दिन गुज़र गया ऐतबार में
रात कट गयी इंतज़ार में

वो मज़ा कहाँ वस्ल-ए-यार में
लुत्फ़ जो मिला इंतज़ार में

उनकी इक नज़र काम कर गयी
होश अब कहाँ होशियार में

मेरे कब्ज़े में आईना तो है
मैं हूँ आपके इख्तेयार में

आँख तो उठी फूल की तरफ
दिल उलझ गया हुस्न-हार में

तुमसे क्या कहें, कितने ग़म सहे
हमने बेवफ़ा तेरे प्यार में

फ़िक्र-ए-आशियां हर खिज़ाम की
आशियां जला हर बहार में

किस तरह ये ग़म भूल जाएं हम
वो जुदा हुआ इश्तिहार में 

Friday, January 27, 2012

अपनी आँखों के समंदर में - apni aankhon ke samandar me

अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे
तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे

ऐ नए दोस्त मैं समझूँगा तुझे भी अपना
पहले माज़ी का कोई ज़ख़्म तो भर जाने दे

आग दुनिया की लगाई हुई बुझ जाएगी
कोई आँसू मेरे दामन पर बिखर जाने दे

ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको
सोचता हूँ कि कहूँ तुझसे मगर जाने दे