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Saturday, March 22, 2014

इक पल ग़मों का दरिया... - ek pal gamon ka dariya

इक पल ग़मों का दरिया इक पल खुशी का दरिया
थमता नहीं कहीं भी ये ज़िन्दगी का दरिया

आँखें थी वो किसी की या ख़्वाब के जज़ीरे
आवाज़ थी किसी की या रागिनी का दरिया

इस दिल की वादियों में अब ख़ाक उड़ रही है
बहता यहीं था पहले इक आशिक़ी का दरिया

किरणों में हैं ये लहरें या लहरों में हैं किरणें
दरिया की चाँदनी है या चाँदनी का दरिया

Wednesday, March 27, 2013

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ... - tum baithe ho lekin jaate dekh raha hun

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ,
मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ,

आने वाले लम्हे से दिल सहमा है,
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हूँ,

कब यादों का ज़ख्म भरे कब दाग मिटे,
कितने दिन लगते हैं भुलाते देख रहा हूँ,

उसकी आँखों में भी काजल फैला है,
मैं भी मुड़ के जाते-जाते देख रहा हूँ.

Tuesday, March 20, 2012

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना... - ab agar aao to aane ke mat aana

अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
सिर्फ अहसान जताने के लिए मत आना

मैंने पलकों पे तमन्‍नाएँ सजा रखी हैं
दिल में उम्‍मीद की सौ शम्में जला रखी हैं
ये हसीं शम्में बुझाने के लिए मत आना

प्‍यार की आग में ज़ंजीरें पिघल सकती हैं
चाहने वालों की तक़दीरें बदल सकती हैं
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना

अब तुम आना जो तुम्‍हें मुझसे मुहब्‍बत है कोई
मुझसे मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई
तुम कोई रस्‍म निभाने के लिए मत आना

Friday, March 2, 2012

प्यास की कैसे लाए ताब कोई... - pyaas ki kaise laaye taab koi

प्यास की कैसे लाए ताब कोई,
नहीं दरिया तो हो सराब कोई,

रात बजती थी दूर शहनाई,
रोया पीकर बहुत शराब कोई,

कौन-सा ज़ख़्म किसने बख़्शा है,
इसका रक्खे कहाँ हिसाब कोई,

फ़िर मैं सुनने लगा हूँ इस दिल की,
आने वाला है फिर अज़ाब कोई.

Wednesday, May 4, 2011

मैं भूल जाऊं तुम्हें - main bhool jaaun tumhe


मैं भूल जाऊं तुम्हें
अब यही मुनासिब है
मगर भुलाना भी चाहूं
तो किस तरह भूलूं
कि तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो
कोई ख़्वाब नहीं
यहां तो दिल का ये आलम है
क्या कहूं...
कम्बख़्त...
भुला सका ना ये वो सिलसिला जो था ही नहीं
वो इक ख़याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं
वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे
वो एक रब्त जो हम में कभी रहा ही नहीं
मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं
अगर ये हाल है दिल का तो कोई समझाए
तुम्हें भुलाना भी चाहूं तो किस तरह भूलूं
कि तुम तो फिर भी हक़ीक़त हो कोई ख़्वाब नहीं

Tuesday, March 22, 2011

शाम होने को है... - shaam hone ko hai

शाम होने को है,

लाल सूरज समंदर में खोने को है
और उसके परे कुछ परिंदे 
कतारें बनाए
उन्हीं जंगलों को चले
जिनके पेड़ों की शाखों पे हैं घोंसले
ये परिंदे वहीं लौटकर जाएंगे
और सो जाएंगे
हम ही हैरान हैं
इस मकानों के जंगल में
अपना कोई भी ठिकाना नहीं
शाम होने को है हम कहाँ जाएंगे

Monday, April 26, 2010

आज मैंने अपना फिर सौदा किया... - aaj maine apna fir sauda kiya

आज मैंने अपना फिर सौदा किया
और फिर मैं दूर से देखा किया

ज़िन्‍दगी भर मेरे काम आए उसूल
एक-एक करके उन्‍हें बेचा किया

कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी
तुम से क्‍या कहते के तुमने क्‍या किया

हो गई थी दिल को कुछ उम्‍मीद सी
ख़ैर तुमने जो किया अच्‍छा किया

Thursday, August 13, 2009

क्यूं डरें, ज़िन्दगी में क्या होगा - kyon daren, zindagi me kya hoga...

क्यूं डरें, ज़िन्दगी में क्या होगा
कुछ न होगा तो तजुर्बा होगा

हंसती आँखों में झाँक कर देखो
कोई आंसू कहीं छुपा होगा

इन दिनों न उम्मीद-सा हूँ मैं
शायद उसने भी ये सुना होगा

देखकर तुमको सोचता हूँ मैं
क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Monday, August 10, 2009

आप भी आईये हमको भी बुलाते रहिये - aap bhi aaiye humko bhi bulate rahiye...

आप भी आईये हमको भी बुलाते रहिये
दोस्ती जुर्म नहीं दोस्त बनाते रहिये

ज़हर पी जाइए और बांटिये अमृत सबको
ज़ख्म भी खाइए और गीत भी गाते रहिये

वक़्त ने लूट लीं लोगों की तम्मानाएं भी
ख्वाब जो देखिये औरों को दिखाते रहिये

शक्ल तो आपके भी ज़हेन में होगी कोई
कभी बन जायेगी तस्वीर बनाते रहिये

Sunday, August 9, 2009

तमन्ना फिर मचल जाये - tamanna phir machal jaye...

तमन्ना फिर मचल जाये अगर तुम मिलने आ जाओ,
ये मौसम ही बदल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

मुझे ग़म है के मैंने ज़िन्दगी में कुछ नहीं पाया,
ये ग़म दिल से निकल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

नहीं मिलते हो मुझसे तुम तो सब हमदर्द हैं मेरे
ज़माना मुझसे जल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ

ये दुनिया भर के झगड़े घर के किस्से काम की बातें
बला हर एक टल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ


Monday, March 2, 2009

दर्द अपनाता है पराये कौन - Dard apnata hai paraaye kaun

दर्द अपनाता है पराये कौन
कौन सुनता है और सुनाये कौन

कौन दोहराए पुरानी बातें
ग़म अभी सोया है जगाये कौन

वो जो अपने हैं, क्या वो अपने हैं
कौन दुःख झेले, आजमाए कौन

अब सुकून है तो भूलने में है
लेकिन उस शख्स को भुलाए कौन

आज फ़िर दिल है कुछ उदास-उदास
देखिये आज याद आए कौन

Friday, February 27, 2009

मैंने दिल से कहा - Maine dil se kaha

मैंने दिल से कहा, ऐ दीवाने बता
जब से कोई मिला, तू है खोया हुआ,
ये कहानी है क्या, है ये क्या सिलसिला, ऐ दीवाने बता

मैंने दिल से कहा, ऐ दीवाने बता
धडकनों में छुपी, कैसी आवाज़ है
कैसा ये गीत है कैसा ये साज़ है,
कैसी ये बात है, कैसा ये राज़ है, ऐ दीवाने बता

मेरे दिल ने कहा, जब से कोई मिला
चाँद तारे फिजां, फूल भंवरे हवा
ये हसीं वादियाँ, नीला ये आसमान
सब है जैसे नया, मेरे दिल ने कहा
मैंने दिल से कहा, मुझको ये तो बता,
जो है तुझको मिला, उसमे क्या बात है
क्या है जादूगरी, कौन है वो परी, ऐ दीवाने बता

ना वो कोई परी, ना कोई महजबीं
ना वो दुनिया में सबसे है ज्यादा हसीं,
भोलीभाली-सी है, सीधी साधी-सी है,
लेकिन उसमे अदा एक निराली सी है
उसके बिन मेरा जीना ही बेकार है,
मैंने दिल से कहा, बात इतनी सी है,
कि तुझे प्यार है,
मेरे दिल ने कहा मुझको इकरार है,
हाँ मुझे प्यार है.

Friday, July 18, 2008

मैं भूल जाऊं तुम्हे - main bhool jaaun tumhe...

मैं भूल जाऊं तुम्हे, अब यही मुनासिब है

मगर भूलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ

कि तुम तो फ़िर भी हकीक़त हो कोई ख्वाब नहीं

यहाँ तो दिल का ये आलम है क्या कहूँ

"कमबख्त" भुला सका ना ये वो सिलसिला जो था ही नहीं

वो इक ख्याल जो आवाज़ तक गया ही नहीं

वो एक बात जो मैं कह नहीं सका तुमसे

वो एक रब्त जो हम में कभी रहा ही नहीं

मुझे है याद वो सब जो कभी हुआ ही नहीं

अगर ये हाल है दिल का तो कोई समझाए

तुम्हें भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूँ कि तुम तो फ़िर भी हकीक़त हो कोई ख्वाब नहीं