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Friday, April 11, 2014

दोस्ती जब किसी से की जाए... - dosti jab kisi se ki jaaye

दोस्ती जब किसी से की जाए,
दुश्मनों की भी राय ली जाए,

मौत का ज़हर है फ़िज़ाओं में,
अब कहाँ जा के साँस ली जाए,

बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ,
ये नदी कैसे पार की जाए,

मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे,
आज फिर कोई भूल की जाए,

बोतलें खोल के तो पी बरसों,
आज दिल खोल कर भी पी जाए.

Saturday, August 15, 2009

मुझे होश नहीं - mujhe hosh nahin...

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं

मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा
बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं