नवीनतम पोस्ट

Showing posts with label रुस्तम सहगल वफ़ा. Show all posts
Showing posts with label रुस्तम सहगल वफ़ा. Show all posts

Sunday, December 18, 2011

क्या ख़बर थी इस तरह से वो जुदा हो जाएगा... - kya khabar thi is tarah se wo juda ho jayega

क्या ख़बर थी इस तरह से वो जुदा हो जाएगा,
ख़्वाब में भी उसका मिलना ख़्वाब सा हो जाएगा,

ज़िन्दगी की क़ैद-ए-ग़म से क्या निकालोगे उसे,
मौत जब आ जायेगी तो खुद ही रिहा हो जाएगा,

दोस्त बनकर उसको चाहा ये कभी सोचा न था,
दोस्ती ही दोस्ती में वो ख़ुदा हो जाएगा,

उसका जलवा होगा क्या जिसका के पर्दा नूर है,
जो भी उसको देख लेगा वो फ़िदा हो जाएगा.

Friday, September 4, 2009

तेरे निसार साक़िया - tere nisaar saqiyaa...

तेरे निसार साक़िया जितनी पियूं पिलाए जा,
मस्त नज़र का वास्ता, मस्त मुझे बनाए जा,

तुझको किसी से दर्द क्या, बिजली कहीं गिराए जा,
दिल जले या जिगर जले, तू यूँही मुस्कुराये जा,

सामने मेरे आ के देख, रुख़ से नक़ाब हटा के देख,
खिलमन-ए-दिल है मुन्तज़िर बर्क़े नज़र गिराए जा,

वफ़ा-ए-बदनसीब को बख्शा है तूने दर्द जो,
है कोई इसकी भी दवा, इतना ज़रा बताये जा,