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Thursday, July 30, 2009

मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो - mujhse bichhad ke khush rahte ho...

मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,

इक टहनी पर चाँद टिका था,
मैं ये समझा तुम बैठे हो,

उजले उजले फूल खिले थे,
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो,

मुझको शाम बता देती है,
तुम कैसे कपड़े पहने हो,

तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो,

Wednesday, July 29, 2009

आँख से दूर न हो - aankh se door na ho...

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा

इतना मानूस न हो खिलवत-ऐ-ग़म से अपनी
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा

तुम सर-ऐ-राह-ऐ-वफ़ा देखते रह जाओगे
और वो बाम-ऐ-रिफ़ाक़त से उतर जाएगा,

ज़िन्दगी तेरी अता है तो यह जाने वाला
तेरी बख्शीश तेरी दहलीज़ पे धर जाएगा

Tuesday, July 28, 2009

फिर उसी रहगुज़र पर, शायद - phir usi rahguzar par,shayad...

फिर उसी रहगुज़र पर, शायद
हम कभी मिल सकें, मगर शायद

जान-पहचान से भी क्या होगा,
फिर भी ऐ दोस्त, गौर कर, शायद

मुन्तज़िर जिनके हम रहे,
उनको मिल गए और हमसफ़र, शायद

जो भी बिछडे हैं, कब मिले हैं "फ़राज़"
फिर भी तू इंतज़ार कर, शायद...

Monday, July 27, 2009

तुझसे मिलने की सज़ा - tujhse milne ki saza...

तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग,
ये वफाओं का सिला देंगे तेरे शहर के लोग,

क्या ख़बर थी तेरे मिलने पे क़यामत होगी,
मुझको दीवाना बना देंगे तेरे शहर के लोग,

तेरी नज़रों से गिराने के लिए जान-ऐ-हया,
मुझको मुजरिम भी बना देंगे तेरे शहर के लोग,

कह के दीवाना मुझे मार रहे हैं पत्थर,
और क्या इसके सिवा देंगे तेरे शहर के लोग

Friday, July 24, 2009

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको - Apne hathon ki lakeeron me basa le mujhko...

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।

मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने,
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।

ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

बादा फिर बादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।

Thursday, July 23, 2009

तारीफ़ उस ख़ुदा की - tareef us khuda ki...

तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहां बनाया,
कैसी ज़मीं बनाई क्या आसमां बनाया,

मिट्टी से बेल फूटे क्या ख़ुशनुमा उग आये,
पहना के सब्ज़ ख़िल्लत उनको जवां बनाया,

सूरज से हमने पाई गर्मी भी रोशनी भी,
क्या खूब चश्मा तूने ए महरबां बनाया,

हर चीज़ से है उसकी कारीगरी टपकती,
ये कारख़ाना तूने कब रायबां बनाया,

Wednesday, July 22, 2009

तुझे ढ़ूंढ़ता था मैं चारसूं - tujhe dhundhata tha main charsu...

तुझे ढ़ूंढ़ता था मैं चारसूं, तेरी शान जल्लेजलाल हूं,
तू मिला क़रीब-ए-रग-ए-गुलूं, तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

तेरी याद में है कली कली है, चमन चमन में हुबल अली,
तू बसा है फूल में हू-ब-हू, तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

तेरे हुक्म से जो हवा चली तो चटक के बोली कली कली,
है करीम तू रहीम तू, तेरी शान जल्लेजलाल हूं,

तेरा जलवा दोनों जहां में है, तेरा नूर कोनोमकां में है,
यहां तू ही तू वहां तू ही तू, तेरी शान जल्लेजलाल हूं

Tuesday, July 21, 2009

ज़रा चेहरे से कमली - jara chehre se kamli...

ज़रा चेहरे से कमली को हटा दो या रसूल-अल्लाह,
हमें भी अपना दीवाना बना दो या रसूल-अल्लाह,

मोहब्बत ग़ैर से मेरी छुड़ा दो या रसूल-अल्लाह,
मेरी सोई हुई क़िस्मत जगा दो या रसूल-अल्लाह,

बड़ी क़िस्मत हमारी है के उम्मत में तुम्हारी हैं,
भरोसा दीन-ओ-दुनिया में तुम्हारा या रसूल-अल्लाह,

अंधेरी कब्र में मुझको अकेला छोड़ जायेंगे,
वहां हो फ़ज़ल से तेरे उजाला या रसूल-अल्लाह,

ख़ुदा मुझको मदीने पे जो पहुँचाये तो बेहतर है,
के रोज़े पर ही दे दूंजां उजाकर या रसूल-अल्लाह,

Monday, July 20, 2009

धूप में निकलो घटाओं में - dhoop me niklo ghataaon me

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो

पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो

फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो

Thursday, July 16, 2009

मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाक़ात - muddat me wo phir taza mulaqat...

मुद्दत में वो फिर ताज़ा मुलाक़ात का आलम,
ख़ामोश अदाओं में वो जज़्बात का आलम,

अल्लाह रे वो शिद्दत-ए-जज़्बात का आलम,
कुछ कह के वो भूली हुई हर बात का आलम,

आरिज़ से ढ़लकते हुए शबनम के वो क़तरे,
आँखों से झलकता हुआ बरसात का आलम,

वो नज़रों ही नज़रों में सवालात की दुनिया,
वो आँखों ही आँखों में जवाबात का आलम