नवीनतम पोस्ट

Showing posts with label सहर. Show all posts
Showing posts with label सहर. Show all posts

Wednesday, June 6, 2012

चराग़-ए-इश्क़ जलाने की रात - charaag-e-ishq jalaane ki raat

चराग़-ए-इश्क़ जलाने की रात आई है,
किसी को अपना बनाने की रात आई है,

फ़लक का चांद भी शरमा के मुंह छुपाएगा,
नक़ाब रुख़ से हटाने की रात आई है,

निग़ाह-ए-साक़ी से पैहम छलक रही है शराब,
पियो के पीने पिलाने की रात आई है,

वो आज आये हैं महफ़िल में चांदनी लेकर,
के रौशनी में नहाने की रात आई है.

Saturday, August 15, 2009

मुझे होश नहीं - mujhe hosh nahin...

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं

मुझको ये भी नहीं मालूम कि जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा
बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं

Sunday, August 2, 2009

तुमने दिल की बात कह दी - tumne dil ki baat kah di...

तुमने दिल की बात कह दी, आज ये अच्छा हुआ,
हम तुम्हें अपना समझते थे, बड़ा धोखा हुआ,

जब भी हमने कुछ कहा, उसका असर उल्टा हुआ,
आप शायद भूलते हैं, बारहा ऐसा हुआ,

आपकी आंखों में ये आंसू कहाँ से आ गये,
हम तो दीवाने हैं लेकिन आपको ये क्या हुआ,

अब किसी से क्या कहें इकबाल अपनी दास्तां,
बस खुदा का शुक्र है जो भी हुआ अच्छा हुआ,

Saturday, August 1, 2009

तेरे बारे में जब सोचा नहीं था - tere baare me jab socha nahin tha..

तेरे बारे में जब सोचा नहीं था,
मैं तन्हा था मगर इतना नहीं था,

तेरी तस्वीर से करता था बातें,
मेरे कमरे में आईना नहीं था,


समन्दर ने मुझे प्यासा ही रखा,
मैं जब सहरा में था प्यासा नहीं था,

मनाने रुठने के खेल में,
बिछड़ जाएंगे हम ये सोचा नहीं था,

सुना है बन्द कर ली उसने आँखे,
कई रातों से वो सोया नहीं था

Thursday, July 30, 2009

मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो - mujhse bichhad ke khush rahte ho...

मुझसे बिछड़ के खुश रहते हो,
मेरी तरह तुम भी झूठे हो,

इक टहनी पर चाँद टिका था,
मैं ये समझा तुम बैठे हो,

उजले उजले फूल खिले थे,
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो,

मुझको शाम बता देती है,
तुम कैसे कपड़े पहने हो,

तुम तन्हा दुनिया से लडोगे,
बच्चों सी बातें करते हो,