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Monday, August 11, 2014

सदमा तो है मुझे भी के तुझसे जुदा हूँ मैं... - sadma to hai mujhe bhi ke tujhse juda hun main

सदमा तो है मुझे भी के तुझसे जुदा हूँ मैं,
लेकिन ये सोचता हूँ के अब तेरा क्या हूँ मैं,

बिखरा पड़ा है तेरे ही घर में तेरा वजूद,
बेकार महफिलों में तुझे ढूँढता हूँ मैं,

ना जाने किस अदा से लिया तूने मेरा नाम,
दुनिया समझ रही है के सब कुछ तेरा हूँ मैं,

ले मेरे तजुर्बों से सबक़ ऐ मेरे रक़ीब,
दो-चार साल उम्र में तुझसे बड़ा हूँ मैं.

इसी ग़ज़ल से अन्य अशआर 

मैं ख़ुदकशी के जुर्म का करता हूं एतराफ़
अपने बदन की क़ब्र में कबसे गड़ा हूं मैं

किस-किसका नाम लाऊँ जुबां पर के तेरे साथ,
हर रोज़ एक शख़्स नया देखता हूँ मैं,

पहुँचा जो तेरे दर पे तो महसूस ये हुआ,
लम्बी-सी इक क़तार में जैसे खड़ा हूँ मैं,

जागा हुआ ज़मीर वो आईना है 'क़तील'
सोने से पहले रोज़ जिसे देखता हूँ मैं.

Sunday, May 11, 2014

तुम्हारी अंजुमन से उठके दीवाने कहाँ जाते... - tumhari anjuman se uthke deewane kahan jaate

तुम्हारी अंजुमन से उठके दीवाने कहाँ जाते,
जो वाबस्ता हुए तुमसे वो अफ़साने कहाँ जाते,

तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादाख़ाने की,
तुम आँखों से पिला देते तो पैमानें कहाँ जाते,

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी,
वगरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते,

निकल कर दैरो काबा से अगर मिलता ना मैख़ाना,
तो ठुकराये हुये इन्सान ख़ुदा जाने कहाँ जाते.

Friday, April 11, 2014

पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइए... - pahle to apne dil ki raza jaan jaaiye

पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइए
फिर जो निगाह-ए-यार कहे मान जाइए

पहले मिजाज़-ए-राहगुजर जान जाइए
फिर गर्द-ए-राह जो भी कहे मान जाइए

कुछ कह रहीं हैं आपके सीने की धड़कनें
मेरी सुनें तो दिल का कहा मान जाइए

इक धूप सी जमी है निगाहों के आसपास
ये आप हैं तो आप पे कुर्बान जाइए

शायद हुज़ूर से कोई निस्बत हमें भी हो
आँखों में झांककर हमें पहचान जाइए

Friday, February 7, 2014

अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ - apne hothon par sajana chahta hun...

अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ

कोई आँसू तेरे दामन पर गिराकर
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ

थक गया मैं करते-करते याद तुझको
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ

छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा
रोशनी हो, घर जलाना चाहता हूँ

आख़री हिचकी तेरे ज़ानों पे आये
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ

Tuesday, January 4, 2011

किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह - kiya hai pyaar jise humne zindagi ki taraha

किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की  तरह

किसे खबर थी बढ़ेगी कुछ और तारिकी
छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह

बढ़ा के प्यास मेरी उसने हाथ छोड़ दिया
वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह

सितम तो ये है कि वो भी ना बन सका अपना
कुबूल हमने किये जिसके ग़म खुशी की तरह

कभी ना सोचा था हमने "क़तील" उस के लिए
करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह

Thursday, July 1, 2010

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है - angdaai pe angdaai leti hai...

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की,
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की

कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में,
मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की

वस्ल की रात ना जाने क्यों इसरार था उनको जाने पर,
वक़्त से पहले डूब गए तारों ने बड़ी दानाई की

उड़ते उड़ते आस का पंछी दूर उफ़क़ में डूब गया,
रोते रोते बैठ गयी आवाज़ किसी सौदाई की.

Friday, December 25, 2009

वो दिल ही क्या... - wo dil hi kya...

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ ना करे,
मैं तुझको भूल के जिंदा रहूँ, खुदा ना करे.

रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर,
ये और बात, मेरी ज़िन्दगी वफ़ा ना करे.

सुना है उसको मुहब्बत दुआए देती है,
जो दिल पे चोट खाए मगर गिला ना करे.

ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में,
खुदा किसी को किसी से मगर जुदा ना करे.

खुदा किसी को किसी पर फ़िदा ना करे,
अगर करे तो क़यामत तलक जुदा ना करे.
(ये शेर जगजीत जी ने रिकॉर्ड नहीं किया है)


(Sung By Jagjit Singh)


(sung by Anup Jalota)

Friday, July 24, 2009

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको - Apne hathon ki lakeeron me basa le mujhko...

अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,
मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना ले मुझको।

मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के माने,
ये तेरी सादा-दिली मार ना डाले मुझको।

ख़ुद को मैं बाँट ना डालूँ कहीं दामन-दामन
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

बादा फिर बादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ ‘क़तील’
शर्त ये है कोई बाहों में सम्भाले मुझको।

Wednesday, March 25, 2009

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह - dard se mera daman bhar de yaa allah...

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह,
फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह,

मैनें तुझसे चाँद सितारे कब माँगे,
रौशन दिल, बेदार नज़र दे या अल्लाह,


सूरज-सी इक चीज़ तो हम सब देख चुके,
सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह,


या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे,
या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह.

Sunday, March 1, 2009

दिल को ग़म-ए-हयात - Dil ko gam-e-hayaat

दिल को ग़म-ए-हयात गंवारा है इन दिनों
पहले जो दर्द था वही चारा है इन दिनों

ये दिल ज़रा सा दिल तेरी यादों में खो गया
ज़र्रे को आँधियों का सहारा है इन दिनों

तुम आ सको तो शब को बढ़ा दूँ कुछ और भी
अपने कहे में सुबहो का तारा है इन दिनों

Saturday, July 26, 2008

यह मोजेज़ा भी मोहब्बत कभी...

यह मोजेज़ा भी मोहब्बत कभी दिखाए मुझे
कि संग तुझपे गिरे और ज़ख्म आए मुझे

वो मेहरबान है तो इकरार क्यूं नहीं करता
वो बदगुमान है तो सौ बार आजमाए मुझे

वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम
दगा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे

मैं अपनी जात में नीलाम हो रहा हूँ 'क़तील'
ग़म-ऐ-हयात से कह दो खरीद लाये मुझे

Thursday, July 24, 2008

मिलकर जुदा हुए तो

मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम

आंसू छलक छलक के सताएंगे रात भर
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम

जब दूरियों की आग दिलों को जलायेगी
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम

गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी 'क़तील"
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम