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Tuesday, September 14, 2010

मय पिलाकर आपका क्या जाएगा - may pilakar aapka kya jayega...

मय पिलाकर आपका क्या जाएगा,
जाएगा ईमान जिसका जायेगा,

देखकर मुझको वो शरमा जाएगा,
ये तमाशा किससे देखा जायेगा.

जाऊं बुतखाने से क्यूँ काबे को मैं,
हाथ से ये भी ठिकाना जाएगा,

क़त्ल की जब उसने दी धमकी मुझे,
कह दिया मैंने कि देखा जायेगा.

पी भी ले दो घूँट "ज़ाहिद" पी भी ले,
मयकदे से कौन प्यासा जायेगा.

Wednesday, September 1, 2010

प्यार का पहला ख़त - pyar ka pahla khat...

प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है,
नये परिन्दों को उड़ने में वक़्त तो लगता है.

जिस्म की बात नहीं थी उनके दिल तक जाना था,
लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है.

गाँठ अगर पड़ जाए तो फिर रिश्ते हों या डोरी,
लाख करें कोशिश खुलने में वक़्त तो लगता है.

हमने इलाज-ए-ज़ख़्म-ए-दिल तो ढूँढ़ लिया है,
गहरे ज़ख़्मों को भरने में वक़्त तो लगता है।