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Tuesday, March 25, 2014

दिल में अब दर्द-ए-मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं... / dil me ab dard-e-muhabbat ke siva kuchh bhi nahin...

दिल में अब दर्द-ए-मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
ज़िन्दगी मेरी इबादत के सिवा कुछ भी नहीं

मैं तेरी बारगाह-ए-नाज़ में क्या पेश करूँ
मेरी झोली में मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

ऐ ख़ुदा मुझसे ना ले मेरे गुनाहों का हिसाब
मेरे पास अश्क-ए-नदामत के सिवा कुछ भी नहीं

वो तो मिटकर मुझ को मिल ही गयी राहत वरना
ज़िन्दगी रंज-ओ-मुसीबत के सिवा कुछ भी नहीं

Wednesday, July 29, 2009

आँख से दूर न हो - aankh se door na ho...

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा

इतना मानूस न हो खिलवत-ऐ-ग़म से अपनी
तू कभी ख़ुद को भी देखेगा तो डर जाएगा

तुम सर-ऐ-राह-ऐ-वफ़ा देखते रह जाओगे
और वो बाम-ऐ-रिफ़ाक़त से उतर जाएगा,

ज़िन्दगी तेरी अता है तो यह जाने वाला
तेरी बख्शीश तेरी दहलीज़ पे धर जाएगा

Monday, July 27, 2009

तुझसे मिलने की सज़ा - tujhse milne ki saza...

तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग,
ये वफाओं का सिला देंगे तेरे शहर के लोग,

क्या ख़बर थी तेरे मिलने पे क़यामत होगी,
मुझको दीवाना बना देंगे तेरे शहर के लोग,

तेरी नज़रों से गिराने के लिए जान-ऐ-हया,
मुझको मुजरिम भी बना देंगे तेरे शहर के लोग,

कह के दीवाना मुझे मार रहे हैं पत्थर,
और क्या इसके सिवा देंगे तेरे शहर के लोग

Monday, July 20, 2009

धूप में निकलो घटाओं में - dhoop me niklo ghataaon me

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो

वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो

पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो

फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो

Wednesday, March 25, 2009

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह - dard se mera daman bhar de yaa allah...

दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह,
फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह,

मैनें तुझसे चाँद सितारे कब माँगे,
रौशन दिल, बेदार नज़र दे या अल्लाह,


सूरज-सी इक चीज़ तो हम सब देख चुके,
सचमुच की अब कोई सहर दे या अल्लाह,


या धरती के ज़ख़्मों पर मरहम रख दे,
या मेरा दिल पत्थर कर दे या अल्लाह.

Monday, August 4, 2008

ग़म का खजाना तेरा भी है मेरा भी...

ग़म का खजाना तेरा भी है मेरा भी
ये नजराना तेरा भी है मेरा भी

अपने गम को गीत बना कर गा ले आ
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी

तू मुझको और मैं तुझको समझाऊँ क्या
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी

शहर में गलियों गलियों जिसका चर्चा है
वो अफसाना तेरा भी है मेरा भी

मैखाने की बात न कर वाइज़ मुझसे
आना-जाना तेरा भी है मेरा भी