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Thursday, July 5, 2012

कोई पास आया सवेरे-सवेरे... - koi paas aaya savere-savere

कोई पास आया सवेरे-सवेरे,
मुझे आज़माया सवेरे-सवेरे,

मेरी दास्ताँ को ज़रा-सा बदल कर,
मुझे ही सुनाया सवेरे-सवेरे,

जो कहता था कल शब संभलना-संभलना,
वही लड़खड़ाया सवेरे-सवेरे,

जली थी शमा रातभर जिसकी ख़ातिर,
उसी को जलाया सवेरे-सवेरे,

कटी रात सारी मेरी मैकदे में,
ख़ुदा याद आया सवेरे सवेरे.

Saturday, October 29, 2011

आँख से आँख मिला बात बनाता क्यूँ है - aankh se aankh mila baat banata kyun hai

आँख से आँख मिला बात बनाता क्यूँ है
तू अगर मुझसे ख़फ़ा है तो छुपाता क्यूँ है

ग़ैर लगता है न अपनों की तरह मिलता है
तू ज़माने की तरह मुझको सताता क्यूँ है

वक़्त के साथ हालात बदल जाते हैं
ये हक़ीक़त है मगर मुझको सुनाता क्यूँ है

एक मुद्दत से जहां काफ़िले गुज़रे ही नहीं
ऐसी राहों पे चराग़ों को जलाता क्यूँ है

Sunday, August 23, 2009

तुम नहीं, ग़म नहीं, शराब नहीं - tum nahin, gham nahin, sharaab nahin...

तुम नहीं, ग़म नहीं, शराब नहीं,
ऐसी तन्हाई का जवाब नहीं,

गाहे गाहे इसे पढ़ा कीजे,
दिल से बेहतर कोई किताब नहीं,

जाने किस किस की मौत आयी है,
आज रुख़ पे कोई नक़ाब नहीं,

वो करम उँगलियों पे गिनते हैं,
ज़ुल्म का जिनके कुछ हिसाब नहीं,

जो क़यामत न ढा सके 'राही',
वो किसी काम का शबाब नहीं.