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Sunday, May 11, 2014

तुम्हारी अंजुमन से उठके दीवाने कहाँ जाते... - tumhari anjuman se uthke deewane kahan jaate

तुम्हारी अंजुमन से उठके दीवाने कहाँ जाते,
जो वाबस्ता हुए तुमसे वो अफ़साने कहाँ जाते,

तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादाख़ाने की,
तुम आँखों से पिला देते तो पैमानें कहाँ जाते,

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी,
वगरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते,

निकल कर दैरो काबा से अगर मिलता ना मैख़ाना,
तो ठुकराये हुये इन्सान ख़ुदा जाने कहाँ जाते.

या तो मिट जाइये या मिटा दीजिए... - yaa to mit jaaiye yaa mita dijiye

या तो मिट जाइये या मिटा दीजिए,
कीजिए जब भी सौदा खरा कीजिए,

अब जफ़ा कीजिए या वफ़ा कीजिए,
आख़री वक़्त है बस दुआ कीजिए,

अपने चेहरे से ज़ुल्फ़ें हटा दीजिए,
और फिर चाँद का सामना कीजिए,

हर तरफ़ फूल ही फूल खिल जाएंगे,
आप ऐसे ही हँसते रहा कीजिए,

आपकी ये हँसी जैसे घुँघरू बजे,
और क़यामत है क्या ये बता दीजिए,

हो सके तो ये हमको सज़ा दीजिए,
अपनी ज़ुल्फों का क़ैदी बना लीजिए.

Saturday, April 26, 2014

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें... - agar hum kahen aur wo muskura den...

अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें,
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें,

हर इक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,
चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें,

अगर ख़ुद को भूले तो कुछ भी न भूले,
के चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें,

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए,
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें,

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे,
चलो उनके चेहरे से पर्दा हटा दें,

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें,
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें.