ऐ खुदा रेत के सेहरा को समंदर कर दे
या छलकती आंखों को भी पत्थर कर दे
तुझको देखा नहीं महसूस किया है मैंने
आ किसी दिन मेरे एहसास को पैकर
और कुछ भी मुझे दरकार नहीं है लेकिन
मेरी चादर मेरे पैरों के बराबर कर दे
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Monday, September 15, 2008
ऐ खुदा रेत के सेहरा को
Monday, August 4, 2008
ग़म का खजाना तेरा भी है मेरा भी...
ग़म का खजाना तेरा भी है मेरा भी
ये नजराना तेरा भी है मेरा भी
अपने गम को गीत बना कर गा ले आ
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी
तू मुझको और मैं तुझको समझाऊँ क्या
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी
शहर में गलियों गलियों जिसका चर्चा है
वो अफसाना तेरा भी है मेरा भी
मैखाने की बात न कर वाइज़ मुझसे
आना-जाना तेरा भी है मेरा भी
ये नजराना तेरा भी है मेरा भी
अपने गम को गीत बना कर गा ले आ
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी
तू मुझको और मैं तुझको समझाऊँ क्या
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी
शहर में गलियों गलियों जिसका चर्चा है
वो अफसाना तेरा भी है मेरा भी
मैखाने की बात न कर वाइज़ मुझसे
आना-जाना तेरा भी है मेरा भी
जब किसी से कोई गिला रखना
जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आइना रखना
यूँ उजालों से वास्ता रखना
शम्मा के पास ही हवा रखना
घर की तामीर चाहे जैसी हो
इसमें रोने की जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिए
अपने घर में कहीं खुदा रखना
मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना
सामने अपने आइना रखना
यूँ उजालों से वास्ता रखना
शम्मा के पास ही हवा रखना
घर की तामीर चाहे जैसी हो
इसमें रोने की जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाजियों के लिए
अपने घर में कहीं खुदा रखना
मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना