नवीनतम पोस्ट
Friday, February 7, 2014
अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ - apne hothon par sajana chahta hun...
अपने होंठों पर सजाना चाहता हूँ
आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
कोई आँसू तेरे दामन पर गिराकर
बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ
थक गया मैं करते-करते याद तुझको
अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ
छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा
रोशनी हो, घर जलाना चाहता हूँ
आख़री हिचकी तेरे ज़ानों पे आये
मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ
Thursday, December 5, 2013
हरसू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे... - harsu dikhai dete hain wo jalwagar mujhe
हरसू दिखाई देते हैं वो जलवागर मुझे,
क्या क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे,
डाला है बेख़ुदी ने अजब राह पर मुझे,
आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे,
दिल लेके मुझसे देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे,
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे,
आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे,
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे.
क्या क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे,
डाला है बेख़ुदी ने अजब राह पर मुझे,
आँखें हैं और कुछ नहीं आता नज़र मुझे,
दिल लेके मुझसे देते हो दाग़-ए-जिगर मुझे,
ये बात भूलने की नहीं उम्र भर मुझे,
आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे,
अब तुम मिले तो कुछ नहीं अपनी ख़बर मुझे.
Wednesday, November 20, 2013
मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार - main roya pardes me bheega maa ka pyaar
मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार,
दुख ने दुख से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार,
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार,
आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार,
लेके तन के नाप को, घूमे बस्ती गाँव,
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव,
सबकी पूजा एक सी, अलग-अलग हर रीत,
मस्जिद जाए मौलवी, कोयल गाए गीत,
पूजा घर में मूर्ति, मीरा के संग श्याम,
जिसकी जितनी चाकरी, उतने उसके दाम,
सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या पीर,
जिस दिन सोए देर तक, भूखा रहे फ़कीर,
अच्छी संगत बैठकर संगी बदले रूप,
जैसे मिलकर आम से मीठी हो गई धूप,
सपना झरना नींद का, जागी आँखें प्यास,
पाना खोना खोजना साँसों का इतिहास,
चाहे गीता बांचिये या पढ़िए क़ुरान,
मेरा तेरा प्यार ही, हर पुस्तक का ज्ञान
दुख ने दुख से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार,
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार,
आँखों भर आकाश है, बाहों भर संसार,
लेके तन के नाप को, घूमे बस्ती गाँव,
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव,
सबकी पूजा एक सी, अलग-अलग हर रीत,
मस्जिद जाए मौलवी, कोयल गाए गीत,
पूजा घर में मूर्ति, मीरा के संग श्याम,
जिसकी जितनी चाकरी, उतने उसके दाम,
सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या पीर,
जिस दिन सोए देर तक, भूखा रहे फ़कीर,
अच्छी संगत बैठकर संगी बदले रूप,
जैसे मिलकर आम से मीठी हो गई धूप,
सपना झरना नींद का, जागी आँखें प्यास,
पाना खोना खोजना साँसों का इतिहास,
चाहे गीता बांचिये या पढ़िए क़ुरान,
मेरा तेरा प्यार ही, हर पुस्तक का ज्ञान