नवीनतम पोस्ट

Sunday, April 13, 2014

जब भी तन्हाई से घबरा के... - jab bhi tanhai se ghabra ke

जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं,
हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं

उन पे तूफ़ाँ को भी अफ़सोस हुआ करता है,
वो सफ़ीने जो किनारों पे उलट जाते हैं,

हम तो आए थे रहें शाख़ में फूलों की तरह,
तुम अगर ख़ार समझते हो तो हट जाते हैं.

Friday, April 11, 2014

पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइए... - pahle to apne dil ki raza jaan jaaiye

पहले तो अपने दिल की रज़ा जान जाइए
फिर जो निगाह-ए-यार कहे मान जाइए

पहले मिजाज़-ए-राहगुजर जान जाइए
फिर गर्द-ए-राह जो भी कहे मान जाइए

कुछ कह रहीं हैं आपके सीने की धड़कनें
मेरी सुनें तो दिल का कहा मान जाइए

इक धूप सी जमी है निगाहों के आसपास
ये आप हैं तो आप पे कुर्बान जाइए

शायद हुज़ूर से कोई निस्बत हमें भी हो
आँखों में झांककर हमें पहचान जाइए

दोस्ती जब किसी से की जाए... - dosti jab kisi se ki jaaye

दोस्ती जब किसी से की जाए,
दुश्मनों की भी राय ली जाए,

मौत का ज़हर है फ़िज़ाओं में,
अब कहाँ जा के साँस ली जाए,

बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ,
ये नदी कैसे पार की जाए,

मेरे माज़ी के ज़ख़्म भरने लगे,
आज फिर कोई भूल की जाए,

बोतलें खोल के तो पी बरसों,
आज दिल खोल कर भी पी जाए.