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Saturday, July 30, 2011

सच्ची बात कही थी मैंने - sachchi baat kahi thi maine

सच्ची बात कही थी मैंने,

लोगों ने सूली पे चढाया,
मुझ को ज़हर का जाम पिलाया,
फिर भी उनको चैन न आया,
सच्ची बात कही थी मैंने,

ले के जहाँ भी वक्त गया है,
ज़ुल्म मिला है, ज़ुल्म सहा है,
सच का ये इनाम मिला है,
सच्ची बात कही थी मैंने,

सब से बेहतर कभी न बनना,
जग के रहबर कभी न बनना,
पीर पयम्बर कभी न बनना,

चुप रह कर ही वक्त गुजारो,
सच कहने पे जान मत वारो,
कुछ तो सीखो मुझ से यारों,

सच्ची बात कही थी मैंने

Monday, June 6, 2011

तुमने सूली पे लटकते जिसे देखा होगा - tumne sooli pe latakte jise dekha hoga

तुमने सूली पे लटकते जिसे देखा होगा,
वक़्त आएगा वही शख्स मसीहा होगा,

ख्वाब देखा था कि सेहरा में बसेरा होगा,
क्या ख़बर थी कि यही ख्वाब तो सच्चा होगा,

मैं फ़िज़ाओं में बिखर जाऊंगा खुशबू बनकर,
रंग होगा न बदन होगा न चेहरा होगा

Sunday, June 5, 2011

दुनिया जिसे कहते हैं... - duniya jise kahte hain...

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,
मिल जाये तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है,

अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम,
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है,

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है,

ग़म हो के ख़ुशी दोनों कुछ देर के साथी हैं,
फिर रस्ता ही रस्ता है हँसना है न रोना है.