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Wednesday, June 18, 2014

बस इक वक़्त का ख़ंजर मेरी तलाश में है... - bas ek waqt ka khanjar meri talash me hai

बस इक वक़्त का ख़ंजर मेरी तलाश में है,
जो रोज़ भेस बदल कर मेरी तलाश में है,

मैं एक क़तरा हूँ मेरा अलग वजूद तो है,
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है,

मैं देवता की तरह क़ैद अपने मंदिर में,
वो मेरे जिस्म के बाहर मेरी तलाश में है,

मैं जिसके हाथ में इक फूल देके आया था,
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है.

Monday, November 23, 2009

ज़िन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं - zindagi se badi saza hi nahin...

ज़िन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं,
और क्या ज़ुर्म है पता ही नहीं.

इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.

सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे,
झूठ की कोई इन्तेहा ही नहीं.

जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं.