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Friday, June 4, 2010

कौन आएगा यहाँ - kaun aayega yahan

कौन आएगा यहाँ, कोई ना आया होगा,
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा.

दिल-ए-नादाँ ना धड़क, ए दिल-ए-नादाँ ना धड़क,
कोई ख़त ले के पडौसी के घर आया होगा.

गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो,
आँधियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा.

"कैफ़" परदेस में मत याद करो अपना मकान,
अबके बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा.

4 comments:

chandar said...

so melodious especially in Jagjit sigh's voice. You can hear it a million times and still long for once more

manish said...

I love this Gazal...... its very heart touching .....

Jitender Singh said...

Jagjit Singh always renders ghazals from the soul.....

Jitender Singh said...

Jagjit Singh always renders ghazals from the soul.....