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Tuesday, June 22, 2010

दिल ही तो है - dil hi to hai...

दिल ही तो है ना संग[1]-ओ-खिश्त[2] दर्द से भर ना आये क्यों?
रोयेंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों?

दैर[3] नहीं, हरम[4] नहीं, दर नहीं आस्तां[5] नहीं
बैठे हैं रहगुज़र[6] पे हम, ग़ैर हमे उठाये क्यों?

हाँ वो नहीं खुदा परस्त, जाओ वो बेवफा सही
जिसको हो दीन-ओ-दिल अजीज़, उसकी गली में जाए क्यों?

"ग़ालिब"-ए-खस्ता के बगैर कौन से काम बंद हैं,
रोइए ज़ार-ज़ार क्या, कीजिये हाय-हाय क्यों?

4 comments:

Udan Tashtari said...

आभार पढ़वाने का.

Mayank Sharma said...

bhai sahab aapki gazal ki chaaap ati sundar he, lekin hard words k meaning k no. likhe he gazal me 1 2 3like but meaning nhi milte he....like sung-o-khist...

Avinash said...

bhai! ye to 1, 2, 3 likhe dikhaai de rahe hain, apna mouse unke oopar rakhen (hover karen) to tip me meaning dikhaai dega.

Mehul said...

संग[1]-ओ-खिश्त - stone or bricks