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Wednesday, March 27, 2013

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ... - tum baithe ho lekin jaate dekh raha hun

तुम बैठे हो लेकिन जाते देख रहा हूँ,
मैं तन्हाई के दिन आते देख रहा हूँ,

आने वाले लम्हे से दिल सहमा है,
तुमको भी डरते घबराते देख रहा हूँ,

कब यादों का ज़ख्म भरे कब दाग मिटे,
कितने दिन लगते हैं भुलाते देख रहा हूँ,

उसकी आँखों में भी काजल फैला है,
मैं भी मुड़ के जाते-जाते देख रहा हूँ.

Wednesday, December 5, 2012

घर से हम निकले थे - ghar se hum nikle the...

घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को,
रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को,

ये ज़बां चलती है, नासेह के छुरी चलती है,
ज़ेबा करने मुझे आये है के समझाने को,

आज कुछ और भी पी लूं के सुना है मैने,
आते हैं हज़रत-ए-वाइज़ मेरे समझाने को,

हट गई आरिज़-ए-रोशन से तुम्हारे जो नक़ाब,
रात भर शम्मा से नफ़रत रही दीवाने को.

Sunday, August 5, 2012

वो नहीं मिलता मुझे इसका गिला... - wo nahin milta mujhe iska gila

वो नहीं मिलता मुझे इसका गिला अपनी जगह,
उसके मेरे दरमियाँ का फ़ासिला अपनी जगह,

ज़िन्दगी के इस सफ़र में सैकड़ों चेहरे मिले,
दिलकशी उनकी अलग, पैकर तेरा अपनी जगह,

तुझसे मिल कर आने वाले कल से नफ़रत मोल ली,
अब कभी तुझसे ना बिछड़ूँ  ये दुआ अपनी जगह,

इक मुसलसल दौड़ में हैं मन्ज़िलें और फ़ासिले,
पाँव तो अपनी जगह हैं रास्ता अपनी जगह.