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Wednesday, June 6, 2012

चराग़-ए-इश्क़ जलाने की रात - charaag-e-ishq jalaane ki raat

चराग़-ए-इश्क़ जलाने की रात आई है,
किसी को अपना बनाने की रात आई है,

फ़लक का चांद भी शरमा के मुंह छुपाएगा,
नक़ाब रुख़ से हटाने की रात आई है,

निग़ाह-ए-साक़ी से पैहम छलक रही है शराब,
पियो के पीने पिलाने की रात आई है,

वो आज आये हैं महफ़िल में चांदनी लेकर,
के रौशनी में नहाने की रात आई है.

Sunday, May 20, 2012

गोपाल गोकुल वल्लभे - Gopal Gokul Vallabhe

गोपाल गोकुल वल्लभे प्रिय गोप गोसुत वल्लभं
चरणारविन्दमहं भजे भजनीय सुरमुनि दुर्लभं

घनश्याम काम अनेक छवि लोकाभिराम मनोहरं
किंजल्क वसन किशोर मूरति भूरिगुण करुणाकरं

सिरकेकी पच्छ विलोलकुण्डल अरुण वनरुहु लोचनं
कुजव दंस विचित्र सब अंग दातु भवभय मोचनं

कच कुटिल सुन्दर तिलक ब्रुराकामयंक समाननं
अपहरण तुलसीदास त्रास बिहारी बृन्दाकाननं


Thursday, March 29, 2012

दिन गुज़र गया ऐतबार में - din guzar gaya aitbaar me

दिन गुज़र गया ऐतबार में,
रात कट गई इंतज़ार में,

वो मज़ा कहाँ वस्ल-ए-यार में,
लुत्फ़ जो मिला इंतज़ार में,

उनकी इक नज़र काम कर गई,
होश अब कहाँ होशियार में,

मेरे कब्ज़े में कायनात है,
मैं हूँ आपके इख्तेयार में,

आँख तो उठी फूल की तरफ,
दिल उलझ गया हुस्न-ए-ख़ार में,

तुमसे क्या कहें, कितने ग़म सहे,
हमने बेवफ़ा तेरे प्यार में,

फ़िक्र-ए-आशियां हर खिज़ां में की,
आशियां जला हर बहार में,

किस तरह ये ग़म भूल जाएं हम,
वो जुदा हुआ इस बहार में.