वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ ना करे,
मैं तुझको भूल के जिंदा रहूँ, खुदा ना करे.
रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर,
ये और बात, मेरी ज़िन्दगी वफ़ा ना करे.
सुना है उसको मुहब्बत दुआए देती है,
जो दिल पे चोट खाए मगर गिला ना करे.
ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में,
खुदा किसी को किसी से मगर जुदा ना करे.
खुदा किसी को किसी पर फ़िदा ना करे,
अगर करे तो क़यामत तलक जुदा ना करे.
(ये शेर जगजीत जी ने रिकॉर्ड नहीं किया है)
(Sung By Jagjit Singh)
(sung by Anup Jalota)
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Friday, December 25, 2009
Monday, November 23, 2009
ज़िन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं - zindagi se badi saza hi nahin...
ज़िन्दगी से बड़ी सजा ही नहीं,
और क्या ज़ुर्म है पता ही नहीं.
इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.
सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे,
झूठ की कोई इन्तेहा ही नहीं.
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं.
और क्या ज़ुर्म है पता ही नहीं.
इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं.
सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे,
झूठ की कोई इन्तेहा ही नहीं.
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं.