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Friday, October 23, 2009

शोला हूँ भड़कने की गुजारिश नहीं करता - shola hun bhadakne ki guzarish nahin karta...

शोला हूँ भड़कने की गुजारिश नहीं करता,
सच मुहँ से निकल जाता है, कोशिश नहीं करता.

गिरती हुई दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन,
चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश[1] नहीं करता.

माथे के पसीने की महक आये ना जैसी,
वो खून मेरे जिस्म में गर्दिश[2] नहीं करता

हमदर्द-ए-एहबाब[3] से डरता हूँ 'मुज़फ्फर'
मैं ज़ख्म तो रखता हूँ, नुमाइश[4] नहीं करता.

Wednesday, August 19, 2009

मेरी ज़िन्दगी किसी और की - meri zindagi kisi aur ki...

मेरी ज़िन्दगी किसी और की, मेरे नाम का कोई और है,
सर-ए-आइना मेरा अक्स है, पस-ए-आइना कोई और है.

मेरी धडकनों में है चाप-सी, ये जुदाई भी है मिलाप सी,
मुझे क्या पता, मेरे दिल बता, मेरे साथ क्या कोई और है,

ना गए दिनों को खबर मेरी, ना शरीक़-ए-हाल नज़र तेरी,
तेरे देश में, मेरे भेस में, कोई और था, कोई और है,

वो मेरी तरफ निगेरां रहे, मेरा ध्यान जाने कहाँ रहे,
मेरी आँख में कई सूरतें, मुझे चाहता कोई और है.