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Thursday, August 26, 2010

मेरा दिल भी शौक से तोड़ो - mera dil bhi shauq se todo...

मेरा दिल भी शौक से तोड़ो, एक तजुर्बा और सही,
लाख खिलौने तोड़ चुके हो, एक खिलौना और सही.

रात है ग़म की आज बुझा दो जलता हर एक चराग,
दिल में अंधेरा हो ही चुका है, घर में अंधेरा और सही.

दम है निकलता एक आशिक़ का, भीड़ है आ कर देख तो लो,
लाख तमाशे देखे होंगे, एक नज़ारा और सही.

खंजर लेकर सोचते क्या हो क़त्ल "मुराद" भी कर डालो,
दाग हैं सौ दामन पे तुम्हारे एक इजाफा और सही.

Saturday, August 21, 2010

है इख्तियार में तेरे - hai ikhtiyaar me tere...

है इख्तियार में तेरे तो मौजज़ा कर दे,
वो शख्स मेरा नहीं है, उसे मेरा कर दे.

ये रेखज़ार कहीं ख़त्म ही नहीं होता,
ज़रा-सी दूर तो रास्ता हरा-भरा कर दे.

मैं उसके ज़ोर को देखूं, वो मेरा सब्र-ओ-सुकूं,
मुझे चराग बना दे, उसे हवा कर दे.

अकेली शाम बहुत ही उदास करती है,
किसी को भेज, कोई मेरा हमनवा कर दे.

Monday, July 26, 2010

अबके बरस भी वो... - abke baras bhi wo...

अबके बरस भी वो नहीं आये बहार में,
गुजरेगा और एक बरस इंतज़ार में.

ये आग इश्क़ की है बुझाने से क्या बुझे?
दिल तेरे बस में है ना मेरे इख्तियार में.

है टूटे दिल में तेरी मुहब्बत, तेरा ख़याल,
कुछ रंग है बहार के उजड़ी बहार में.

आंसू नहीं है आँख में लेकिन तेरे बगैर,
तूफ़ान छुपे हुए हैं दिल-ए-बेकरार में.