नवीनतम पोस्ट

Showing posts with label Amzad Islam "Amzad". Show all posts
Showing posts with label Amzad Islam "Amzad". Show all posts

Thursday, July 31, 2008

चाँद के साथ कई दर्द पुराने निकले...

चाँद के साथ कई दर्द पुराने निकले
कितने ग़म थे जो तेरे ग़म के बहाने निकले

फसल-ऐ-गुल आई फ़िर एक बार असीरान-ऐ-वफ़ा
अपने ही खून के दरिया में नहाने निकले

दिल ने एक ईंट से तामीर किया ताजमहल
तूने एक बात कही लाख फ़साने निकले

दश्त-ऐ-तन्हाई-ऐ-हिजरां में खड़ा सोचता हूँ
हाय क्या लोग मेरा साथ निभाने निकले